Saturday, August 8, 2020

Janmashtmi

                              जन्माष्टमी

भारत आदिकाल से ऋषि मुनियो के साथ-साथ  पर्वो एवं त्योहारो का देश रहा है | इस अगस्त को देशभर में कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा।  इस दिन को लोग भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाते हैं। इस पर्व को रक्षाबंधन के बाद भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। 

श्री कृष्ण देवकी और वासुदेव के 8वें पुत्र थे। मथुरा नगरी का राजा कंस था, जो कि बहुत अत्याचारी था। उसके अत्याचार दिन-प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे थे।  एक समय आकाशवाणी हुई कि उसकी बहन देवकी का 8वां पुत्र उसका वध करेगा। यह सुनकर कंस ने अपनी बहन देवकी को उसके पति वासुदेवसहित काल-कोठारी में डाल दिया। कंस ने देवकी के कृष्ण से पहले के 7 बच्चों को मार डाला।

जब देवकी ने श्री कृष्ण को जन्म दिया, तब भगवान विष्णु ने वासुदेव को आदेश दिया कि वे श्री कृष्ण को गोकुल में यशोदा माता और नंद बाबा के पास पहुंचा आएं, जहां वह अपने मामा कंस से सुरक्षित रह सकेगा। श्री कृष्ण का पालन-पोषण यशोदा माता और नंद बाबा की देखरेख में हुआ।  भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत के युद्ध मे अहम भूमिका निभाई थी | 

भगवान श्री कृष्ण कभी नही चाहते थे की महाभारत का युद्ध हो उन्होने उस युद्ध को रोकने के काफी प्रयास किए थे | जब उनकी बात नही मानी ज्ञी तब उन्होने कहा की तरफ मेरी सेना रहेगी और एक तरफ मै और मै स्वयं युद्ध मे हथियार नही उठौङ्गा और उन्होने ऐसा ही किया पूरे महाभारत के युद्ध मे उन्होने हथियार नही उठाए | 



गीताजी के एक श्लोक मे गीतज्ञान दाता खुद कह रहा की मै काल हूँ श्लोक देखे
अध्याय 11 के श्लोक 32

कालः, अस्मि, लोकक्षयकृृत्, प्रवृृद्धः, लोकान्, समाहर्तुम्, इह, प्रवृृत्तः,
ऋते, अपि, त्वाम्, न, भविष्यन्ति, सर्वे, ये, अवस्थिताः, प्रत्यनीकेषु, योधाः।।32।।

अध्याय 11 के श्लोक 32 में काल भगवान कह रहा है कि मैं लोकों का नाश करने वाला बढ़ा हुआ काल हूँ। इस समय लोकों को नष्ट करने के लिए आया (प्रकट हुआ) हूँ। जो प्रतिपक्षियों की सेना में स्थित योद्धा लोग हैं वे सब तेरे बिना भी नहीं रहंेगे अर्थात् मैं खा जाऊँगा।


ऊपर लिखे हुए श्लोक से स्पष्ट हो गया की गीताजी का ज्ञान श्री कृष्ण ने नही दिया था गीताजी का ज्ञान "काल भगवान" ने दिया था | बॉलीवुड की कई फिल्मों मे बताने की कोशिह की ज्ञी है की भगवान कौन है लेकिन किसी भी फिल्म मे पूर्णतया स्पष्ट नही कर पाये की भगवान कौन है और हमे भक्ति किसकी करनी चाहिए | 


संत रामपाल दास जी महाराज जी ने सर्व धर्म के सद्ग्रंथों से स्पष्ट करके बताया की पूर्ण परमात्मा "कबीर" साहब है | कबीर परमात्मा चरो युगो मे अलग अलग नाम से आते है | एक आम आदमी की तरह जीवन व्यपन क्र्क्ते हुए परमात्मा के गुणगान करते हुए समझते है की पूर्ण मोक्ष कैसे होगा |  वर्तमान समय मे संत रामपाल जी महाराज जी पूर्ण संत है जो सत्भगति देके मोक्ष प्राप्ति करवाते है |

मेरा ब्लॉग पढ़ने वाले सभी साथियो से निवेदन है आप सभी संत रामपाल दास जी महाराज द्वारा लिखी हुई पुस्तक "ज्ञान गंगा" "जीने की राह" एवं "भक्ति से भगवान तक" जरूर पढे साथ ही हमारी वैबसाईटwww.jagatgururampalji.org पर visit करे जी

Wednesday, June 24, 2020

आत्महत्या : एक डरावना शब्द

                 आत्महत्या

आत्महत्या एक ऐसा शब्द है, जिसे सुनते ही हम भय से काँपने लगते है। कहने को तो यह एक मनचाही मौत है लेकिन वास्तव में यह एक अनचाही और अनपेक्षित मौत की दर्दनाक घटना है। फांसी, जहर खाना,नदी में कूदना, उचाई से गिरना,चलती ट्रेन से कूदना,आग में झुलस जाना और न जाने कैसे-कैसे तरीके अपनाए जाते है आत्महत्या करने के लिए।
आखिर क्यों बढ़ती जा रही हैं खुद को खत्म करने की यह प्रवर्ति........????
इसका कारण क्या गरीबी है,या बेरोजगारी है,या फिर मासूम लोगो का हर चीज में बहिष्कार करना है।
 मनुष्य पर ढेर सारे समझौते,जिम्मेदारियां तथा सामाजिक दबाव के कारण वह कभी खुश महसूस नही कर पाता।
देश का हर मनुष्य दिन प्रतिदिन टूटता जा रहा है इसकी बहुत सी वजह हमारे सामने आई है। वह अपनी तकलीफों को बढ़ावा देते हुए सोच लेता है कि उससे अधिक कोई भी इतनी तकलीफ़े नही झेल रहा होगा लेकिन उसे यह पता ही नही है कि उससे भी अधिक लोग अत्यंत दुखी है।

आत्महत्या में मरने वाला तो एक ही इंसान होता है परंतु  उस इंसान को यह भयंकर कदम उठाने में कई लोगो का हाथ होता है।कोई जानने की कोशिश भी नही करता कि उस टूटते-बिलखते इंसान के अंदर चल क्या रहा है।ओर-तो-ओर कई की तो कोशिश ही यही रहती है कि अगर वह न रहे तो हमारे रास्ते का कांटा ही खत्म हो जाएगा।इस तरह से मानव स्वार्थवश अपने ही लोगो को आत्महत्या जैसी स्थिति तक लाने पर मजबूर कर देते है।हाल ही में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या को चुना क्योंकि शायद वह भी ऐसी ही कुछ परिस्थितियों से गुजरे होंगे,जहाँ उनकी जिंदगी ही उनके लिए एक बोझ बन गई होगी।
हर इंसान के जीवन मे एक ऐसा दौर आता है,जब सब कुछ समाप्त लगने लगता है,लेकिन इसका मतलब यह तो नही कि हम खुद को ही खत्म कर ले।
अतः आत्महत्या करना एक समस्या का समाधान नहीं है।आत्महत्या करने से शरीर तो नष्ट हो गया लेकिन दुःख तो वही का वही है।क्योंकि आगे मनुष्य को 84 लाख योनियां(जिसमे कुत्ते,गधे,सुअर,बैल, सांप,पक्षी जैसे दुखी जीवन व्यतीत करने पड़ते है)भुगतनी पड़ती है।एक मनुष्य जन्म ही है जिसमे मनुष्य खुश रहकर अपना जीवन व्यतीत कर सकता है। हकीकत तो यह है कि मनुष्य शरीर पाने के लिए देवी-देवता तरसते है,वो हमसे ज्यादा दुःखी है,क्योंकि जितना बड़ा पद उतनी ही ज्यादा परेशानी।परन्तु कई ऐसे भी लोग देखने को मिले जो आत्महत्या की कगार पर आ खड़े थे लेकिन ऐसा मानो कि वही से उन्हें ज़िंदगी की नई शुरुआत देखने को मिली।और आज वही लोग एक सुखमयी जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

जी हाँ! सिर्फ एक छोटी सी किताब उन्हें जीना सीखा रही है जिसे पढ़ने के बाद वही लोग विचार करते है कि वाकई आत्महत्या करने से दुख समाप्त नहीं बल्कि कई गुना ज्यादा बढ़ते चले जाते हैं और हम इस अनमोल जीवन को व्यर्थ में ही खो देते अगर हमें जिंदगी की सच्चाई बताने वाली पुस्तक नही मिलती तो।उन्हें ज्ञान होता है कि हमे मनुष्य जन्म बार-बार नही मिलता,84 लाख योनियो के चक्कर लगाने के बाद मनुष्य जन्म मिलता है और इसे भी हम आत्महत्या कर यूँही खत्म कर रहे थे।अभी तक हमे यह पता नही था कि मनुष्य जन्म हमे मिलता ही क्यो है,जिसे पाने के लिए सुर-असुर तरसते है।
तो आइये जानते है कि मनुष्य जन्म का उद्देश्य क्या है।
मनुष्य जन्म हमे सिर्फ समर्थ भगवान की सत्यभक्ति करने के लिए मिला है,जिसके आधार पर हम मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं,जिसके बारे में गीता ज्ञान दाता श्रीमदभगवत गीता के अध्याय 18 के श्लोक62 में अर्जुन को कह रहा है कि हे अर्जुन! तू उस परमेश्वर की शरण मे जा,जहाँ जाने के बाद तू परमधाम अर्थात शाश्वत स्थान को प्राप्त होगा।

ऐसी बहुत सी अद्भुत जानकारी उस अनमोल पुस्तक में मिली जिसे पढ़कर मनुष्यों के आंखों के आंसू तक नही रुके।हम बात कर रहे है पुस्तक "जीने की राह" की,जिसके लेखक सतलोक आश्रम भक्ति मुक्ति ट्रस्ट संस्था के कबीर पंथी सन्त रामपाल जी महाराज जी है।उनकी बताई गई भक्ति मार्ग पर सेकड़ो लोगो ने एक नई जिंदगी की शुरुआत की, जिसमे वे सभी अपना एक सादगीपूर्ण जीवन भक्ति, सेवा,दान,धर्म में व्यतीत कर रहे है,जिससे उन्हें भगवान से मिलने वाले कई लाभ प्राप्त हो रहे है,जिनकी शायद उन्हें उम्मीद भी नही थी।


अतः आपसे भी करबद्ध जोड़कर नम्र निवेदन है कि आप भी अपनी व्यस्त जिंदगी में कम-से-कम एक बार यह पुस्तक अवश्य पढ़ें तथा अपने परिवारजनों, मित्रों, सगे-संबंधियों को भी यह पुस्तक पढ़ने के लिए प्रेरित करे।यह पुस्तक आप जी को भी एक नई जीने की राह प्रदान करेगी।अतः एक वाक्य में कहे तो हर समस्या का समाधान है पुस्तक "जीने की राह"।
यदि आप पुस्तक पढ़ने के इच्छुक हैं तो हमे 7496801825 नम्बरों पर अपना नाम,पूरा पता तथा मोबाइल नंबर भेजे। आपको 15 दिन में यह पुस्तक बिल्कुल निःशुल्क प्राप्त हो जाएगी।
तथा प्रतिदिन अवश्य देखिए साधना टीवी पर सन्त रामपाल जी महाराज जी के मंगल प्रवचन रात्रि 7:30 बजे।
हमारी वेबसाइट:-
www.jagatgururampalji.org

Friday, May 29, 2020

kabir is god

Kabir is supreme god

GodKabir Comes In 4 Yugas
  Kabir Paramatma came in Kalyuga under his real name Kabir and met a weaver couple named Neeru Neema on a lotus flower at Lahartara pond. 

  

For more information see sadhna chanel at 7:30pm
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Sunday, February 10, 2019

संतो की शिक्षा

           संतो की शिक्षा

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सन्तो की शिक्षा से ही सदभक्ति प्राप्त होती है 
मनमाना आचरण श्रीमद्भागवत गीता जी के भी विरुद्ध है
गीता में सांकेतिक नाम जाप से पूर्ण मोक्ष सम्भव है
सन्त रामपाल जी महाराज शास्त्रानुसार भक्ति विधि  बताते है

Janmashtmi

                              जन्माष्टमी भारत आदिकाल से ऋषि मुनियो के साथ-साथ  पर्वो एवं त्योहारो का देश रहा है | इस अगस्त को देशभर में कृष्...